विजय क सामने अपने पिता यानि ठाकुर निर्भयसिंघ का ऐसा रूप आया जिसके सामने आने पर विजय की रगो मे दौड़ता खून मनो जम गया । वह सोच भी नहीं सकता था कि ठाकुर साहब अपने स्वार्थ क लिए मासूम लोगो का कत्ल तक कर…
ऐसे ऐसे जुल्म किये थे उसने की विजय विकास ने जब सुना तो एक ही कसम खाए । यह कि वे आज के रावण को किसी हालत में जिन्दा नहीं छोड़ेंगे लेकिन जब वो शख्स सामने आया तो दोनों के होश फाख्ता हो गए क्यूंकि वो, वो…
हिमालय हमारी सीमाओं का प्रहरी है । जब वह ही गोलियों की आवाज़ और गोलों की गर्जना से चीख उठा तो हिमालय क प्रहरियों ने खून की कैसी नदियां बहाई ।
Format : PDF
Language : Hindi
Pages : 266
Size : 9 MB…
वो हालात की भंवर मे फँसा एक मासूम इंसान था. जिसे जिंदगी की चाहत से ज़्यादा अपनो की फ़िक्र थी और जब अपनो पर आने वाली मुसीबत की उसने कल्पना की तो उसे उन्हे बचाने की सिर्फ़ एक ही राह नज़र आई और उसने दे…