विजय क सामने अपने पिता यानि ठाकुर निर्भयसिंघ का ऐसा रूप आया जिसके सामने आने पर विजय की रगो मे दौड़ता खून मनो जम गया । वह सोच भी नहीं सकता था कि ठाकुर साहब अपने स्वार्थ क लिए मासूम लोगो का कत्ल तक कर…
ऐसे ऐसे जुल्म किये थे उसने की विजय विकास ने जब सुना तो एक ही कसम खाए । यह कि वे आज के रावण को किसी हालत में जिन्दा नहीं छोड़ेंगे लेकिन जब वो शख्स सामने आया तो दोनों के होश फाख्ता हो गए क्यूंकि वो, वो…